मंडी में प्राकृतिक खेती की धूम: 48,380 किसान जुड़े, 8,400 हेक्टेयर में रसायनमुक्त फसलें!
मंडी जिले में प्राकृतिक खेती ने तेज़ी पकड़ी है, जहाँ अब तक 48,380 किसान इस मुहिम से जुड़ चुके हैं। कुल 8,400 हेक्टेयर भूमि पर किसान बिना किसी रसायन के खेती कर रहे हैं, जिससे उनकी मिट्टी और फसल दोनों स्वस्थ हो रही हैं।
एक नज़र में
- मंडी जिले में 48,380 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़े, जो एक बड़ी उपलब्धि है।
- कुल 8,400 हेक्टेयर कृषि भूमि पर अब रसायनमुक्त खेती हो रही है, जिससे किसानों को बेहतर उपज और मंडी भाव मिल रहे हैं।
- किसान प्राकृतिक खेती अपनाकर लागत कम कर सकते हैं, मिट्टी का स्वास्थ्य सुधार सकते हैं और अपनी फसलों की गुणवत्ता बढ़ा सकते हैं।
हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में प्राकृतिक खेती का आंदोलन अब एक बड़ी सफलता की कहानी बन रहा है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, जिले में प्राकृतिक खेती को अपनाने वाले किसानों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है। अब तक 48,380 किसान इस पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धति से जुड़ चुके हैं, जो न केवल मिट्टी के स्वास्थ्य को सुधारती है, बल्कि किसानों की लागत भी कम करती है।
इन किसानों ने मिलकर 8,400 हेक्टेयर कृषि भूमि को रसायनमुक्त बना दिया है, जहाँ अब पूरी तरह से प्राकृतिक तरीकों से फसलें उगाई जा रही हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि किसान अब रासायनिक खादों और कीटनाशकों के हानिकारक प्रभावों को समझ रहे हैं और स्थायी कृषि समाधानों की ओर बढ़ रहे हैं।
प्राकृतिक खेती अपनाने वाले किसानों को सरकार और कृषि विभाग द्वारा लगातार सहायता प्रदान की जा रही है। उन्हें प्रशिक्षण, बीज, और जैविक खाद बनाने की विधियों के बारे में जानकारी दी जाती है।
इस पहल से किसानों को न केवल अपनी उपज की गुणवत्ता सुधारने में मदद मिल रही है, बल्कि उन्हें अपनी फसलों के लिए बेहतर मंडी भाव भी मिल रहे हैं, क्योंकि उपभोक्ता अब रसायनमुक्त उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
प्राकृतिक खेती से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है, पानी की खपत कम होती है और जैव विविधता को बढ़ावा मिलता है, जिससे दीर्घकालिक रूप से किसानों को आर्थिक और पर्यावरणीय दोनों तरह से लाभ होता है।
यह सफलता अन्य जिलों के किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत है। मंडी जिले के किसानों ने दिखा दिया है कि कैसे पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीकों का मेल करके एक स्वस्थ और टिकाऊ कृषि प्रणाली विकसित की जा सकती है। कृषि मित्र की टीम सभी किसानों से आग्रह करती है कि वे भी प्राकृतिक खेती के बारे में जानकारी प्राप्त करें और इसे अपनाकर अपनी आय बढ़ाएं और धरती माँ को स्वस्थ रखें।
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