खड़ी फसल में हाथ से खाद बिखेरता किसान — मात्रा का हिसाब बोरी से नहीं, रकबे और नाइट्रोजन से बनता है।
बोरी गिनने से पहले रकबा और नाइट्रोजन जान लीजिए
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105 किलो
धान-गेहूं में प्रति एकड़
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20.7 किलो
एक बोरी में असल नाइट्रोजन
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0.16–0.63
एकड़ में एक बीघा
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भूमिका
खाद की दुकान पर सबसे ज़्यादा पूछा जाने वाला सवाल यही है — "एक एकड़ में कितनी यूरिया डालनी है?" और जवाब में अक्सर एक ही लाइन मिलती है — "दो-तीन बोरी डाल दो"। यही अंदाज़ा हर साल हज़ारों रुपये और फसल दोनों का नुकसान करता है, क्योंकि सही मात्रा फसल, ज़मीन और आपने पहले से कौन सी खाद डाली है — तीनों पर निर्भर करती है।
दूसरी बड़ी उलझन बीघा है। बीघा पूरे देश में एक जैसा नहीं है — पश्चिमी उत्तर प्रदेश का बीघा लगभग 0.62 एकड़ का है, जबकि हरियाणा का बीघा सिर्फ़ 0.21 एकड़ का। यानी एक ही "एक बीघा में इतनी यूरिया" वाली सलाह दो राज्यों में तीन गुने के फर्क पर पहुँचा देती है। इस लेख में फसलवार सही मात्रा, बीघे का राज्यवार हिसाब, और वह आसान फॉर्मूला है जिससे आप अपने खेत का सही जवाब खुद निकाल सकते हैं।
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सीधा जवाब — 1 एकड़ में कितनी यूरिया
सिंचित धान और गेहूं जैसी सामान्य ऊँची उपज वाली फसलों में 1 एकड़ के लिए लगभग 105 किलो यूरिया — यानी 45 किलो वाली करीब 2.3 बोरी — पूरे सीज़न में लगती है। यह एक बार में नहीं, बल्कि दो या तीन किश्तों में डाली जाती है।
यह पूरे सीज़न का कुल हिसाब है: बुवाई या रोपाई के समय की बेसल खाद और बाद की टॉप ड्रेसिंग — सब मिलाकर।
अगर आपने DAP डाली है तो उससे मिली नाइट्रोजन घटानी पड़ेगी, वरना नाइट्रोजन ज़रूरत से ज़्यादा हो जाती है।
दलहन फसलों में यह मात्रा नहीं लगती: चना, मसूर और मटर अपनी नाइट्रोजन खुद बनाते हैं — इनमें आधी बोरी के आसपास ही, वह भी सिर्फ़ बुवाई के समय।
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एक बोरी यूरिया 45 किलो की होती है, पर उसमें असल नाइट्रोजन सिर्फ़ 20.7 किलो होती है। यूरिया में नाइट्रोजन 46% होती है — बाकी 54% वह ढाँचा है जो नाइट्रोजन को दाने की शक्ल देता है। इसीलिए "कितनी बोरी" का जवाब हमेशा "कितनी नाइट्रोजन चाहिए" से निकलता है।
🧮
हिसाब कैसे बनता है — एक फॉर्मूला, हर फसल
कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केंद्र की सिफारिश हमेशा किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर में लिखी होती है, जबकि किसान बोरी प्रति एकड़ या बीघा में सोचता है। इन दोनों के बीच का पुल सिर्फ़ तीन लाइनों का है।
हेक्टेयर से एकड़: सिफारिश की मात्रा को 2.47 से भाग दीजिए, क्योंकि 1 हेक्टेयर 2.47 एकड़ के बराबर होता है।
नाइट्रोजन से यूरिया: जितनी नाइट्रोजन चाहिए, उसे 2.17 से गुणा कीजिए, क्योंकि यूरिया में नाइट्रोजन 46% है।
यूरिया से बोरी: मिली मात्रा को 45 से भाग दीजिए।
उदाहरण: धान की आम सिफारिश 120 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर है। 120 ÷ 2.47 = 48.6 किलो नाइट्रोजन प्रति एकड़। 48.6 × 2.17 = 105 किलो यूरिया। 105 ÷ 45 = 2.3 बोरी प्रति एकड़। पूरा गणित बस इतना ही है, और यही हर फसल पर लागू होता है।
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फसलवार यूरिया — प्रति एकड़ पूरी तालिका
नीचे दी गई मात्रा पूरे सीज़न की कुल यूरिया है, इस शर्त पर कि नाइट्रोजन सिर्फ़ यूरिया से दी जा रही हो। DAP या NPK कॉम्प्लेक्स डालने पर अगले सेक्शन के हिसाब से इसे घटाइए।
फसल
नाइट्रोजन (किलो/एकड़)
यूरिया प्रति एकड़
किश्तें
धान — सामान्य उन्नत किस्म (सिंचित)
48
105 किलो (2.3 बोरी)
3
धान — हाइब्रिड
61
132 किलो (2.9 बोरी)
3
धान — बासमती / सुगंधित
36
79 किलो (1.8 बोरी)
2–3
गेहूं — सिंचित, समय से बुवाई
48
105 किलो (2.3 बोरी)
3
गेहूं — बारानी (असिंचित)
24
53 किलो (1.2 बोरी)
1
मक्का — हाइब्रिड
61
132 किलो (2.9 बोरी)
3
सरसों — सिंचित
32
70 किलो (1.6 बोरी)
2
आलू
73
158 किलो (3.5 बोरी)
2
गन्ना — पौधा फसल
73
158 किलो (3.5 बोरी)
3
गन्ना — पेड़ी (रैटून)
91
198 किलो (4.4 बोरी)
3
चना / मसूर / मटर
8
18 किलो (0.4 बोरी)
1 (बुवाई पर)
सोयाबीन
10
22 किलो (0.5 बोरी)
1 (बुवाई पर)
⚠️
ये सामान्य सिफारिशें हैं। असल मात्रा किस्म, बुवाई के समय, मिट्टी के जैविक कार्बन और आपके राज्य के पैकेज ऑफ प्रैक्टिसेज़ के साथ बदलती है — जैसे झुलसा यानी ब्लास्ट रोग वाले इलाकों में धान की नाइट्रोजन जानबूझकर कम रखी जाती है। अपनी मिट्टी जाँच रिपोर्ट देखकर और नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से एक बार पुष्टि करके ही अंतिम मात्रा तय कीजिए।
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1 बीघा में कितनी यूरिया? — पहले अपना बीघा जानिए
एकड़ पूरे देश में एक ही होता है — 43,560 वर्ग फुट। बीघा नहीं। बीघा राजस्व का पुराना स्थानीय पैमाना है और यह राज्य, और कई बार ज़िले तक बदल जाता है। यही वजह है कि "एक बीघा में इतनी यूरिया" वाली सलाह किसी किसान के लिए सही बैठती है और किसी के लिए आधी गलत निकलती है।
नीचे प्रचलित मान दिए गए हैं, और साथ में 105 किलो प्रति एकड़ वाली फसल यानी धान-गेहूं के लिए प्रति बीघा मात्रा।
राज्य / क्षेत्र
1 बीघा (वर्ग फुट)
एकड़ में
यूरिया प्रति बीघा
पश्चिमी उत्तर प्रदेश
27,000
0.62
65 किलो
पूर्वी उत्तर प्रदेश
20,000
0.46
48 किलो
बिहार
27,220
0.63
66 किलो
राजस्थान — पक्का बीघा
27,225
0.63
66 किलो
राजस्थान — कच्चा बीघा
17,424
0.40
42 किलो
मध्य प्रदेश
12,000
0.28
29 किलो
गुजरात
17,427
0.40
42 किलो
पश्चिम बंगाल / असम
14,400
0.33
35 किलो
हरियाणा / पंजाब
9,070
0.21
22 किलो
उत्तराखंड
6,804
0.16
17 किलो
⚠️
बीघा कोई सरकारी मानक इकाई नहीं है — एक ही राज्य के दो ज़िलों में यह अलग हो सकता है, और कच्चे-पक्के बीघे का फर्क तो लगभग डेढ़ गुना का है। खाद खरीदने से पहले अपनी खतौनी या खसरा देख लीजिए, जिसमें रकबा हेक्टेयर में लिखा रहता है, या लेखपाल-पटवारी से एक बार पूछ लीजिए।
🧮
अपने खेत का पक्का जवाब, बीघे के झंझट के बिना: खेत की लंबाई और चौड़ाई फुट में नाप लीजिए, फिर —
यूरिया (किलो) = प्रति एकड़ मात्रा × (खेत का क्षेत्रफल वर्ग फुट ÷ 43,560)।
उदाहरण: 200 फुट × 150 फुट = 30,000 वर्ग फुट। धान के लिए 105 × (30,000 ÷ 43,560) = 72 किलो यूरिया। यह तरीका हर राज्य और हर बीघे में सही रहता है।
➖
DAP या NPK डाली है? — तो यूरिया घटाइए
यह वह हिसाब है जो सबसे ज़्यादा छूटता है। DAP सिर्फ़ फॉस्फोरस की खाद नहीं है — उसमें 18% नाइट्रोजन भी होती है। जो किसान बेसल में DAP डालकर ऊपर से पूरी यूरिया भी डाल देता है, वह फसल को ज़रूरत से ज़्यादा नाइट्रोजन दे रहा है, और उसका पैसा भी बहा रहा है।
बेसल में डाली खाद
उससे मिली नाइट्रोजन
इतनी यूरिया घटाइए
DAP — 1 बोरी (50 किलो)
9 किलो
20 किलो
DAP — आधी बोरी (25 किलो)
4.5 किलो
10 किलो
NPK 12:32:16 — 1 बोरी (50 किलो)
6 किलो
13 किलो
NPK 10:26:26 — 1 बोरी (50 किलो)
5 किलो
11 किलो
SSP — 1 बोरी (50 किलो)
0 किलो
कुछ नहीं
MOP पोटाश — 1 बोरी (50 किलो)
0 किलो
कुछ नहीं
पूरा उदाहरण: एक एकड़ धान, जिसमें बेसल पर एक बोरी DAP डाली गई। कुल ज़रूरत 105 किलो यूरिया थी और DAP से 9 किलो नाइट्रोजन पहले ही मिल चुकी है — इसलिए 105 घटा 20 = 85 किलो यूरिया बची, जो दो टॉप ड्रेसिंग में लगभग 42-43 किलो करके दी जाएगी।
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पूरी यूरिया एक बार में क्यों नहीं
यूरिया मिट्टी में पड़ते ही घुलने लगती है और नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा दो रास्तों से निकल जाता है — अमोनिया गैस बनकर हवा में, और नाइट्रेट बनकर पानी के साथ जड़ों से नीचे। पौधा उतना ही ले पाता है जितना उस समय उसकी बढ़वार को चाहिए, बाकी बह जाता है।
एक बार में पूरी डालने पर: शुरू में फालतू नाइट्रोजन बहती है, और बाद में जब बालियाँ और दाने बन रहे होते हैं तब खेत भूखा रह जाता है।
किश्तों में डालने पर: हर किश्त उस समय पहुँचती है जब पौधे की माँग सबसे ज़्यादा है, इसलिए उतनी ही खाद से ज़्यादा उपज मिलती है।
बारानी खेत अपवाद है: जहाँ सिंचाई का भरोसा नहीं, वहाँ पूरी मात्रा बुवाई के समय नमी में देना ही व्यावहारिक रहता है।
किस फसल में किस दिन कौन सी किश्त पड़ेगी, इसका पूरा कैलेंडर यूरिया कब-कितना डालें वाली गाइड में है, और डालने के बाद पानी लगाने का सही तरीका इस लेख में दिया गया है।
🚫
ये गलतियाँ कभी न करें
पड़ोसी की बोरी गिनकर अपनी मात्रा तय करना — उसका रकबा, उसकी किस्म और उसकी बेसल खाद आपसे अलग है।
DAP की नाइट्रोजन न घटाना — यह सबसे आम और सबसे महँगी चूक है, और इससे फसल में कीट-रोग भी बढ़ जाते हैं।
"गहरा हरा दिखे तो अच्छा है" मान लेना — गहरा नीला-हरा खेत ज़्यादा नाइट्रोजन की निशानी है, जिसमें फसल गिरने और कीट लगने का खतरा बढ़ता है।
बीघे को एकड़ मान लेना — ज़्यादातर राज्यों में बीघा एकड़ से छोटा है, इसलिए एकड़ वाली मात्रा बीघे में डालने का मतलब है ज़रूरत से कहीं ज़्यादा खाद।
दलहन में धान जैसी यूरिया डालना — चना, मसूर, मटर और सोयाबीन में ज़्यादा नाइट्रोजन से पौधा तो बढ़ता है पर फली कम लगती है।
मिट्टी जाँच कराए बिना सालों वही मात्रा दोहराना — खेत की उर्वरता बदलती रहती है, इसलिए सिफारिश भी बदलनी चाहिए।
🗓️
एक एकड़ की यूरिया — किश्तों का बँटवारा
फसल
पहली किश्त
दूसरी किश्त
तीसरी किश्त
धान (कुल 105 किलो)
रोपाई पर ~50 किलो
कल्ले फूटते समय ~28 किलो
बाली बनने पर ~27 किलो
गेहूं (कुल 105 किलो)
बुवाई पर ~35 किलो
पहली सिंचाई पर ~35 किलो
दूसरी सिंचाई पर ~35 किलो
मक्का (कुल 132 किलो)
बुवाई पर ~45 किलो
घुटने की ऊँचाई पर ~45 किलो
फूल आने से पहले ~42 किलो
सरसों (कुल 70 किलो)
बुवाई पर ~35 किलो
पहली सिंचाई पर ~35 किलो
—
गन्ना पौधा (कुल 158 किलो)
बुवाई के ~45 दिन पर ~53 किलो
~90 दिन पर ~53 किलो
~120 दिन पर ~52 किलो
यह बँटवारा तब का है जब पूरी नाइट्रोजन यूरिया से दी जा रही हो। DAP या NPK डाली हो तो पहली किश्त उतनी ही घटा दीजिए और बाद की किश्तें वैसी ही रहने दीजिए।
✅
निष्कर्ष
तीन बातें याद रखिए। पहली — सिंचित धान-गेहूं में एक एकड़ पर करीब 105 किलो यानी 2.3 बोरी यूरिया, वह भी किश्तों में। दूसरी — बीघा हर राज्य में अलग है, इसलिए बोरी गिनने से पहले अपना रकबा एकड़ या वर्ग फुट में जान लीजिए। तीसरी — DAP या NPK डाली है तो उसकी नाइट्रोजन घटाना मत भूलिए।
खाद का सही जवाब बोरी में नहीं, किलो नाइट्रोजन में लिखा होता है — हिसाब एक बार सीख लीजिए, फिर हर फसल में वही काम आएगा।
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❓
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
11 एकड़ में कितना यूरिया डालना चाहिए?
सिंचित धान और गेहूं में 1 एकड़ पर लगभग 105 किलो यूरिया, यानी 45 किलो वाली करीब 2.3 बोरी पूरे सीज़न में लगती है, दो-तीन किश्तों में बाँटकर। हाइब्रिड धान और मक्का में यह करीब 132 किलो यानी 2.9 बोरी और गन्ने में 158 किलो यानी 3.5 बोरी तक जाती है, जबकि चना-मसूर जैसी दलहन में सिर्फ़ 18 किलो के आसपास।
21 बीघा में कितना यूरिया डालना चाहिए?
यह इस पर निर्भर है कि आपका बीघा कितने वर्ग फुट का है। धान-गेहूं के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बीघे यानी 27,000 वर्ग फुट में करीब 65 किलो, पूर्वी उत्तर प्रदेश के 20,000 वर्ग फुट वाले बीघे में करीब 48 किलो और हरियाणा-पंजाब के 9,070 वर्ग फुट वाले बीघे में सिर्फ़ 22 किलो यूरिया लगती है। इसीलिए खाद खरीदने से पहले खतौनी से अपना रकबा देख लेना सबसे सुरक्षित तरीका है।
3एक बोरी यूरिया में कितनी नाइट्रोजन होती है?
45 किलो की एक बोरी में 20.7 किलो असल नाइट्रोजन होती है, क्योंकि यूरिया में नाइट्रोजन की मात्रा 46% होती है। यही वजह है कि सिफारिश हमेशा किलो नाइट्रोजन में दी जाती है, और उसे 2.17 से गुणा करके यूरिया की मात्रा निकाली जाती है।
4धान में 1 एकड़ के लिए कितनी यूरिया चाहिए?
सामान्य उन्नत किस्म के सिंचित धान में 1 एकड़ पर करीब 105 किलो यूरिया लगती है, तीन किश्तों में — रोपाई पर लगभग 50 किलो, कल्ले फूटते समय 28 किलो और बाली बनने पर 27 किलो। हाइब्रिड धान में यह बढ़कर लगभग 132 किलो हो जाती है और बासमती में घटकर लगभग 79 किलो, क्योंकि बासमती ज़्यादा नाइट्रोजन पर गिर जाती है।
5गेहूं में एक एकड़ में कितनी यूरिया डालें?
सिंचित और समय से बोए गेहूं में 1 एकड़ पर लगभग 105 किलो यूरिया लगती है — मोटे तौर पर बुवाई, पहली सिंचाई और दूसरी सिंचाई पर 35-35 किलो करके। बारानी यानी बिना सिंचाई वाले गेहूं में यह घटकर करीब 53 किलो रह जाती है और पूरी मात्रा बुवाई के समय नमी में दी जाती है।
6अगर DAP डाल दी है तो यूरिया कितनी घटानी चाहिए?
DAP की एक बोरी यानी 50 किलो से 9 किलो नाइट्रोजन मिलती है, इसलिए यूरिया में से 20 किलो घटा दीजिए। NPK 12:32:16 की बोरी पर 13 किलो और 10:26:26 की बोरी पर 11 किलो यूरिया कम कीजिए। SSP और पोटाश में नाइट्रोजन नहीं होती, इसलिए उनसे कुछ घटाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।
71 हेक्टेयर में कितनी यूरिया लगती है?
सिंचित धान-गेहूं में 1 हेक्टेयर पर करीब 260 किलो यूरिया, यानी 45 किलो वाली लगभग 5.8 बोरी लगती है, 120 किलो नाइट्रोजन प्रति हेक्टेयर के हिसाब से। 1 हेक्टेयर 2.47 एकड़ के बराबर होता है, इसलिए एकड़ वाली मात्रा को 2.47 से गुणा कर देने पर हेक्टेयर का हिसाब निकल आता है।
8ज़्यादा यूरिया डालने से क्या नुकसान होता है?
ज़रूरत से ज़्यादा यूरिया पर फसल गहरी हरी और मुलायम हो जाती है, जिससे वह गिरती है और उसमें कीट-रोग तेज़ी से लगते हैं — धान में भूरा फुदका और झुलसा इसकी आम मिसाल हैं। साथ ही दाने कम और भूसा ज़्यादा बनता है, और खर्च किया पैसा भी बहकर निकल जाता है।
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