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🌾 धान 🗓️ रोपाई के 20–50 दिन 🧪 खाद व उर्वरक

धान में यूरिया कब और कितनी बार When and How Often to Apply Urea in Paddy

धान को नाइट्रोजन दो ही मौकों पर चाहिए — कल्ले फूटते समय और गाभ बनते समय। बाकी दिनों में डाली गई यूरिया ज़्यादातर बह जाती है।

✍️ Kunal Rajput — KrashiMitra ⏱️ 10 मिनट पढ़ें 📅 सितंबर 2026

कल्ला और गाभ — यूरिया के दो असली मौके

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20–25 दिन
पहली टॉप ड्रेसिंग
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45–50 दिन
दूसरी टॉप ड्रेसिंग
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बाली के बाद
यूरिया बिल्कुल नहीं
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भूमिका

धान के खेत में यूरिया कब डाली जाए — यह सवाल हर रोपाई के बाद उठता है, और इसी एक फैसले पर उपज का बड़ा हिस्सा टिका होता है। यूरिया सही दिन पर पड़े तो कल्ले बढ़ते हैं और बालियाँ भरी निकलती हैं; गलत दिन पर पड़े तो वही खाद पत्ती बढ़ाकर फसल गिरा देती है और कीट-रोग बुला लेती है।

सबसे महँगी गलतफहमी यह है कि "यूरिया जितनी जल्दी और जितनी ज़्यादा, उतना अच्छा"। असल में धान को नाइट्रोजन दो खास मौकों पर चाहिए — जब कल्ले फूट रहे हों, और जब बाली बननी शुरू हो रही हो। इस लेख में रोपाई के दिन से गिनकर पूरा कार्यक्रम है — कौन सी किश्त किस दिन, कितने किलो, और किस हालत में यूरिया बिल्कुल नहीं डालनी


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सीधा जवाब — तीन किश्तें, तीन मौके

सामान्य उन्नत किस्म के रोपाई वाले सिंचित धान में यूरिया तीन किश्तों में दी जाती है, और तीनों का समय पौधे की अवस्था से तय होता है, कैलेंडर की तारीख से नहीं।

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1 एकड़ में पूरे सीज़न की कुल यूरिया करीब 105 किलो, यानी 45 किलो वाली 2.3 बोरी। इसे मोटे तौर पर 50 किलो + 28 किलो + 27 किलो में बाँटा जाता है। हाइब्रिड धान में यह बढ़कर करीब 132 किलो और बासमती में घटकर लगभग 79 किलो हो जाती है।

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रोपाई के कितने दिन बाद यूरिया डालें

किसान अक्सर दिन गिनकर काम करता है, इसलिए नीचे वही हिसाब दिन के हिसाब से दिया गया है। मात्रा एक एकड़ की है, और यह मानकर चली है कि पूरी नाइट्रोजन यूरिया से दी जा रही है।

रोपाई से दिनफसल की अवस्थाकुल का हिस्सायूरिया प्रति एकड़
0–3 दिनरोपाई / बेसललगभग 50%~50 किलो
20–25 दिनकल्ले फूटना (टिलरिंग)लगभग 25%~28 किलो
45–50 दिनगाभ / बाली बननालगभग 25%~27 किलो
बाली निकलने के बादफूल व दाना भरनाकुछ नहींयूरिया न डालें

लंबी अवधि की किस्मों में तीसरी किश्त 50-55 दिन तक खिसक सकती है, और कम अवधि की किस्मों में यह 40 दिन के आसपास ही आ जाती है। तारीख नहीं, फसल देखकर तय कीजिए — गाभ बनने का समय ही तीसरी किश्त का सही समय है।

⚠️
मात्रा किस्म, अवधि और मिट्टी के हिसाब से बदलती है — ब्लास्ट यानी झुलसा रोग वाले इलाकों में नाइट्रोजन जानबूझकर कम रखने की सलाह दी जाती है। अपनी मिट्टी जाँच रिपोर्ट और नज़दीकी कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग की सिफारिश से एक बार मिलान ज़रूर कर लीजिए।

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धान में यूरिया कितनी बार डालनी चाहिए

दो से तीन बार — इससे ज़्यादा नहीं, और एक बार में तो बिल्कुल नहीं। कितनी बार डालनी है यह किस्म की अवधि से तय होता है।

पूरी यूरिया एक बार में डालने पर उसका बड़ा हिस्सा या तो अमोनिया गैस बनकर उड़ जाता है या पानी के साथ बह जाता है, और बाद में जब बाली बन रही होती है तब खेत भूखा रह जाता है। किश्तों का पूरा गणित एकड़-बीघा के हिसाब वाले लेख में है।


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पानी का प्रबंधन — यूरिया बचाने का मुफ़्त तरीका

धान में सबसे बड़ा नुकसान खाद की मात्रा से नहीं, पानी के गलत प्रबंधन से होता है। भरे और बहते पानी में डाली गई यूरिया नाली के रास्ते खेत से ही बाहर निकल जाती है, और किसान को पता तक नहीं चलता।

यूरिया और सिंचाई का पूरा तालमेल यूरिया डालने के बाद पानी कब दें वाले लेख में विस्तार से दिया गया है।


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कितनी ज़रूरत है, यह फसल खुद बताती है

अंदाज़े से यूरिया डालने की जगह पौधे की पत्ती देखकर फैसला करना ज़्यादा भरोसेमंद है, और इसमें कोई खर्च नहीं आता।

देखने की बात✅ ठीक नाइट्रोजन❌ गड़बड़ी
पत्ती का रंगसामान्य हराफीका पीला (कमी) या गहरा नीला-हरा (अधिकता)
कौन सी पत्ती पहले पीलीकोई नहींनीचे की पुरानी पत्तियाँ पहले — यही नाइट्रोजन की कमी है
पौधे की बनावटसीधा, मज़बूत तनामुलायम, लंबा, हवा-पानी में गिरने वाला
कल्लों की संख्याभरपूर और एक जैसेकम कल्ले, कमज़ोर बढ़वार
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पत्ती रंग चार्ट (LCC) धान में नाइट्रोजन तय करने का सबसे सस्ता वैज्ञानिक तरीका है — सबसे ऊपर की पूरी खुली पत्ती का रंग चार्ट के तय शेड से नीचे गिरे, तभी अगली किश्त दीजिए। ऊपर की नई पत्तियाँ पीली हों तो वह नाइट्रोजन नहीं, आमतौर पर जिंक या गंधक की कमी होती है — उस पर यूरिया डालने से कुछ नहीं होगा।

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पहली टॉप ड्रेसिंग के साथ क्या डालें

धान में नाइट्रोजन अकेली पूरी कहानी नहीं है। यह देश के बड़े हिस्से में जिंक की कमी वाली फसल है, और जिंक की कमी में यूरिया का असर भी अधूरा रह जाता है।

⚠️
जिंक और पोटाश की मात्रा तभी दीजिए जब मिट्टी जाँच में कमी दिखे या कृषि विभाग ने आपके इलाके के लिए सिफारिश की हो। बिना ज़रूरत डाली गई खाद पैसा भी लेती है और मिट्टी का संतुलन भी बिगाड़ती है।

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ये गलतियाँ कभी न करें


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सीधी बुवाई और अलग-अलग किस्मों में क्या बदलता है

खेती का तरीका / किस्मकुल यूरिया प्रति एकड़खास बात
रोपाई वाला सामान्य धान~105 किलोतीन किश्तें — 0, 20-25 और 45-50 दिन
हाइब्रिड धान~132 किलोमाँग ज़्यादा, पर आखिरी किश्त फिर भी गाभ तक ही
बासमती / सुगंधित~79 किलोज़्यादा नाइट्रोजन पर गिरती है, इसलिए कम और हल्की किश्तें
सीधी बुवाई (DSR)~105 किलोबेसल कम, किश्तें ज़्यादा — बुवाई, 20-25 दिन और 40-45 दिन पर

सीधी बुवाई में खेत शुरू में सूखा रहता है, इसलिए वहाँ यूरिया हमेशा सिंचाई या बारिश से पहले या नम मिट्टी में ही डालनी चाहिए — सूखी सतह पर बिखेरी खाद का बड़ा हिस्सा उड़ जाता है।


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रोपाई से कटाई तक — पूरा कार्यक्रम

समयज़रूरी काम
रोपाई से पहलेआखिरी पडलिंग में फॉस्फोरस और पोटाश की पूरी बेसल मात्रा मिलाएँ
रोपाई के 0–3 दिनकुल यूरिया का लगभग आधा, उथले पानी में, निकास बंद रखकर
10–15 दिनखरपतवार नियंत्रण; खाली जगहों पर पौधे भरें
15–20 दिनजिंक की कमी दिखे तो जिंक सल्फेट ~10 किलो प्रति एकड़
20–25 दिनदूसरी किश्त — कल्ले फूटते समय ~28 किलो यूरिया प्रति एकड़
30–40 दिनतना छेदक और फुदका की निगरानी; ज़्यादा हरा खेत खतरे का संकेत
45–50 दिनतीसरी किश्त — गाभ बनते समय ~27 किलो यूरिया प्रति एकड़
बाली निकलने के बादयूरिया बंद; अब सिर्फ़ पानी और कीट-रोग प्रबंधन

निष्कर्ष

तीन बातें याद रखिए। पहली — धान में यूरिया तीन किश्तों में: रोपाई पर, 20-25 दिन पर और 45-50 दिन पर। दूसरी — डालने से पहले खेत का निकास बंद कीजिए और पानी की परत उथली रखिए। तीसरी — बाली निकलने के बाद यूरिया का काम खत्म

धान में यूरिया की तारीख कैलेंडर से नहीं, खेत को देखकर तय होती है — कल्ला और गाभ, यही दो मौके असली हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1धान में यूरिया कब डालना चाहिए?
रोपाई वाले धान में यूरिया तीन बार दी जाती है — रोपाई के समय, रोपाई के 20-25 दिन बाद जब कल्ले फूट रहे हों, और 45-50 दिन बाद जब गाभ यानी बाली बन रही हो। बाली निकल आने के बाद यूरिया डालने का कोई फायदा नहीं, उससे सिर्फ़ पत्ती बढ़ती है और फसल गिरने का खतरा बढ़ता है।
2धान की रोपाई के कितने दिन बाद यूरिया डालें?
पहली टॉप ड्रेसिंग रोपाई के 20-25 दिन बाद और दूसरी 45-50 दिन बाद करनी चाहिए। कम अवधि वाली किस्मों में यह समय थोड़ा पहले, लगभग 18-20 और 40 दिन पर आ जाता है, जबकि लंबी अवधि की किस्मों में आखिरी किश्त 50-55 दिन तक खिसक सकती है।
3धान में यूरिया कितनी बार डालनी चाहिए?
दो से तीन बार, इससे ज़्यादा नहीं। मध्यम और लंबी अवधि की किस्मों में तीन किश्तें — बेसल, कल्ले और गाभ — और कम अवधि की किस्मों में दो किश्तें काफी रहती हैं। एक ही बार में पूरी यूरिया डालने पर उसका बड़ा हिस्सा गैस बनकर उड़ जाता है या पानी के साथ बह जाता है।
4धान में 1 एकड़ में कितना यूरिया डालना चाहिए?
सामान्य उन्नत किस्म के सिंचित धान में 1 एकड़ पर पूरे सीज़न में करीब 105 किलो यूरिया, यानी 45 किलो वाली 2.3 बोरी — मोटे तौर पर रोपाई पर 50 किलो, कल्ले फूटते समय 28 किलो और गाभ बनते समय 27 किलो। हाइब्रिड धान में यह करीब 132 किलो और बासमती में लगभग 79 किलो रहती है।
5धान में पहली यूरिया के साथ क्या डालें?
जिंक की कमी वाले खेतों में पहली टॉप ड्रेसिंग के आसपास लगभग 10 किलो जिंक सल्फेट प्रति एकड़ यूरिया या सूखी मिट्टी में मिलाकर बिखेरा जाता है, क्योंकि धान में जिंक की कमी बहुत आम है। पोटाश की आधी मात्रा भी इसी समय दी जा सकती है, पर खरपतवारनाशी को यूरिया के साथ नहीं मिलाना चाहिए
6धान में यूरिया डालने के बाद कितने दिन में पानी देना चाहिए?
धान में सही तरीका पानी बाद में देना नहीं, बल्कि पहले खेत का निकास बंद करके 2-3 सेंटीमीटर की उथली परत में यूरिया डालना और 1-2 दिन तक पानी बाहर न जाने देना है। अगर खेत सूखा है तो डालने के तुरंत बाद हल्की सिंचाई कीजिए, क्योंकि सूखी सतह पर पड़ी यूरिया की नाइट्रोजन का बड़ा हिस्सा अमोनिया बनकर उड़ जाता है।
7क्या बाली आने के बाद धान में यूरिया डाल सकते हैं?
नहीं। बाली निकलने के बाद डाली गई यूरिया दाने नहीं भरती — वह सिर्फ़ पत्तियाँ बढ़ाती है, पौधे को मुलायम बनाकर गिरा देती है और भूरा फुदका जैसे कीट व झुलसा जैसे रोग को न्योता देती है। नाइट्रोजन का आखिरी उपयोगी मौका गाभ बनने का समय है, यानी रोपाई के लगभग 45-50 दिन बाद।
8धान की सीधी बुवाई (DSR) में यूरिया कब डालें?
सीधी बुवाई में कुल मात्रा लगभग वही रहती है, पर बेसल हिस्सा कम रखकर किश्तें बढ़ाई जाती हैं — बुवाई के समय, फिर 20-25 दिन और 40-45 दिन पर। सबसे ज़रूरी बात यह है कि DSR का खेत शुरू में सूखा रहता है, इसलिए यूरिया हमेशा नम मिट्टी में या सिंचाई-बारिश से ठीक पहले डालनी चाहिए।
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